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मेरे गुनाहों की सजा मुझे दे रही हो

मेरे गुनाहों की सजा मुझे दे रही हो यह सही है अपनी आदत में सुधार लाएंगे हर शिकवे गिले दूर करने की कोशिश करेंगे


पलकों को झुकाकर शर्माना और तिरछी नजरों से देखकर मुस्कुराना अपनी अदाओं से मन मोह लेती हो तुम्हारा यह अंदाज मुझमें प्यार का एहसास जगाता है

उलझा रहता हूं तुम्हारे दीदार में कुछ सूझता नहीं है तुम भी मेरे मन को रिझाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती हो

तुम्हारी तारीफे मेरे जुबान पर आती है मैं हैरान हूं तुमने ऐसा जादू कर दिया है

Shayari sangrah Gorakhpur

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